Wednesday, 22 April 2015

Square Puzzle Solved !!

The trick here is to count the number of squares you can see. Majority of people tend to omit certain element as seen below. The original post claimed they could only find 27 squares. Majority of people will find 34, 36, or 38. How many can you find? A lot of good guesses on the square puzzle that has been showing up on a lot of people’s timelines recently. Most tend to forget the 2 boxes that the 4 smaller boxes are contained in, and the 4 – 3×3 boxes. The correct answer is: 40 Here’s how it done.

Sunday, 7 December 2014

जानें, मासूमों को किस तरह बचाएं शोषण से


बच्चे शरीर और मन से कोमल होने की वजह से आसानी से शोषण के शिकार हो जाते हैं। इसी वजह से उनकी हिफाजत के लिए देश के कानून में ढेरों प्रावधान किए गए हैं। क्या हैं ये प्रावधान और उनका इस्तेमाल कैसे करें, एक्सपर्ट्स की मदद से बता रहे हैं राजेश चौधरी : बच्चों के कानूनी अधिकार : बच्चों को संरक्षित करने के लिए कानून में कई तरह के प्रावधान किए गए हैं : मजदूरी पर रोक - 14 साल के कम उम्र वाले किसी बच्चे से मजदूरी करवाने पर पाबंदी है। कानून में 18 तरह के कामों (ढाबों में काम, घरेलू काम, दुकान पर काम आदि) और 65 तरह के प्रोसेस बताए गए हैं, जिन्हें 14 साल से कम उम्र वाले बच्चों से नहीं करवाया जा सकता। इस लिस्ट में लगभग हर तरह का काम शामिल है। इन कामों और प्रोसेस की लिस्ट को goo.gl/dHTIDk पर देख सकते हैं। - जहां बाकी पूरे देश में बच्चों से मजदूरी पर पाबंदी की उम्र सीमा 14 साल है, वहीं दिल्ली में यह सीमा 18 साल है। इस हिसाब से किसी भी घर में तय उम्र सीमा से कम की मेड और नौकर काम करते दिखें तो काम करवाने वाले को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। - पूरे देश में 18 साल से कम वालों से खतरनाक इंडस्ट्री जैसे केमिकल, खदान, विस्फोटक आदि में काम की मनाही है। - 18 साल से कम वालों से खदान में काम नहीं कराया जा सकता। इस तरह का प्रतिबंध मानइ ऐक्ट ऑफ 1952 के तहत है। - 14 साल से कम के बच्चों को चुनिंदा खतरनाक कामों में रोकने का प्रावधान चाइल्ड लेबर प्रोहेबिशन एंड रेग्युलेशन एक्ट 1986 में है। शहरों में कम उम्र में घरेलू काम करने वालों पर अक्सर यही कानून लगता है। - किसी भी बच्चे को खतरनाक हालात में काम करवाना या बंधक बना कर काम करवाना एक अपराध है। इस तरह की रोक जुवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन एक्ट 2000 के तहत लगाई गई है। पढ़ाई का अधिकार - बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार मूल अधिकार है और इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत प्रावधान है कि 6 साल से 14 साल के बच्चों को शिक्षा अनिवार्य तौर पर दी जाए। एक मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बच्चे की मां को निर्देश दिया था कि वह बच्ची को स्कूल से वापस न लें। स्कूल से बच्चे को वापस लेना एक अपराध की तरह है। - 6 से 14 साल तक के बच्चों की फ्री शिक्षा का प्रावधान है। साथ ही इस कानून में कहा गया है कि हर प्राइवेट स्कूल अपनी 25 फीसदी सीटें समाज के कमजोर तबके के बच्चों और विकलांग बच्चों से भरें। राइट ऑफ चिल्ड्रेन टु फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन एक्ट 2009 तहत इस तरह का नियम बच्चों की बेसिक एजुकेशन के लिहाज से बनाया गया है। अगर कोई स्कूल इन नियमों को नहीं मानता तो उसके खिलाफ संबंधित शिक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है। वहां भी सुनवाई न होने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। पिटाई से हिफाजत स्कूल में - अगर कोई टीचर किसी स्टूडेंट को मानसिक या शारीरिक तौर पर परेशान करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इसके लिए कानून में प्रावधान है कि सर्विस रूल्स के हिसाब से जिम्मेदार स्कूल स्टाफ या टीचर पर कार्रवाई हो। हालांकि आरटीई में इसे सीरियस मिसकंडक्ट नहीं माना गया है। ऐसे केसों में पैरंट्स प्रिंसिपल या एजुकेशन डिपार्टमेंट में सीधे शिकायत कर सकते हैं। राइट टु एजुकेशन एक्ट-17 के तहत ऐसा प्रावधान है। - अगर किसी बच्चे को स्कूल में पीटा या परेशान किया जाता है तो पैरंट्स स्कूल प्रशासन के अलावा, नैशनल कमिशन फॉर प्रोटक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) और राज्य सरकार के एजुकेशन डिपार्टमेंट में शिकायत कर सकते हैं। पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट-23 इस तरह का प्रावधान किया गया है। अगर बच्चे के साथ गंभीर मारपीट का मामला पेश आता है तो पैरंट्स आईपीसी की धारा-323 (मारपीट), 324 (जख्मी करना), 325 (गंभीर जख्म पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज करा सकते हैं। - बच्चों के साथ की जाने वाली किसी भी तरह की प्रताड़ना को कॉर्पोरल पनिशमेंट माना गया है। अगर बच्चों का शारीरिक तौर पर किसी भी तरह से शोषण किया जाता है तो वह कॉर्पोरल पनिशनमेंट है। मिसाल के तौर पर चांटा मारना, कान खींचना आदि कॉर्पोरल पनिशमेंट के दायरे में आता है। इसके अलावा अगर उसे किसी खास पोजिशन में खड़ा रखा जाता है, बेंच पर खड़ा किया जाता है, गलत तरीके से उसको पुकारा जाता है या फिर ठेस पहुंचाने वाला कमेंट किया जाता है या कुछ भी ऐसा किया जाता है, जो बच्चे को शारीरिक और मानसिक तौर पर नुकसान पहुंचता है तो वह कॉर्पोरल पनिशनमेंट माना जाएगा। - कॉर्पोरल पनिशमेंट को रोकने के लिए एनसीपीसीआर (नैशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स) ने गाइडलाइंस जारी की हुई हैं और केंद्र सरकार ने तमाम स्कूलों को उसे लागू करने के लिए सर्कुलर भी जारी किया है। गाइडलाइंस में कॉर्पोरल पनिशमेंट को परिभाषित किया गया है। इसके तहत दोषी के खिलाफ सख्त एक्शन का प्रावधान किया गया है। राइट टु एजुकेशन ऐक्ट में भी कॉर्पोरल पनिशमेंट का जिक्र किया गया है। इन नियमों को लागू करना स्कूल की जिम्मेदारी है। घर में - अगर किसी बच्चे के माता-पिता या पैरंट्स उससे सही बर्ताव नहीं करते या उसके साथ हिंसक तरीके से पेश आते हैं तो इसकी शिकायत चाइल्ड वेलफेयर कमिटी में की जा सकती है। हर जिले में इस तरह की चाइल्ड वेलफेयर कमेटियों का गठन किया गया है। - वहां शिकायत लिखित में या ईमेल से भी की जा सकती है। मिसाल के तौर पर दिल्ली में goo.gl/3f9R0d पर जाकर शिकायत की जा सकती है। यहां इस मामले पर पूरी जानकारी भी है। - किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेकर ये कमेटियां जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट के तहत मामला चाइल्ड इन नीड एंड केयर कमेटी के पास भेज सकती हैं। - इस तरह के मामलों में बच्चे को पैरंट्स से अलग करके चाइल्ड वेलफेयर कमेटी उनकी देखरेख करती हैं। गंभीर मामलों में जेजे ऐक्ट के सेक्शन 23 के तहत 6 महीने की सजा भी हो सकती है। शारीरिक शोषण से बचाव - 18 साल से कम उम्र के बच्चों से सेक्सुअल नेचर का अपराध पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस) कानून के दायरे में आता है। - इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के लड़के या लड़की दोनों को ही प्रोटेक्ट किया गया है। ऐसे मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है और बच्चों के साथ होने वाले अपराध के लिए उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। - इस ऐक्ट के तहत बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराध से प्रोटेक्ट किया गया है। 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा दी जाती है। क्राइम होने पर संरक्षण - आईपीसी के सेक्शन 82 के तहत अगर बच्चे की उम्र 7 साल से कम है तो उस पर किसी भी अपराध के लिए कहीं भी केस नहीं चलाया जा सकता। - आईपीसी का सेक्शन 83 में बताया गया है कि 7 से 12 साल की उम्र तक अपराध होने पर जज यह तय करेगा कि वह मानसिक रूप से कितना मच्योर है। अगर जज उसे मानसिक तौर पर मच्योर पाता है तो जेजे एक्ट के तहत उस पर कार्रवाई हो सकती है। - जेजे एक्ट के तहत 18 साल (नाबालिग) से कम उम्र वालों से अपराध हो जाने पर ट्रायल कोर्ट में केस नहीं चलाया जा सकता है और न ही उसे सजा दी जाती है। - नाबालिग का मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाता है और अगर अपराध साबित हो जाता है तो उसे जेल न भेज कर अधिकतम 3 साल के लिए सुधार गृह में भेजा जाता है। - बच्चे की उम्र तय करने के लिए दसवीं के सर्टिफिकेट को पहला आधार माना जाता है। उसके बाद क्रम से स्कूल में भर्ती के वक्त लिखाई उम्र, म्युनिसिपल या पंचायत का बर्थ सर्टिफिकेट और ऐसा कुछ न होने पर मेडिकल टेस्ट (बोन टेस्ट) के जरिए उम्र तय की जाती है। कौन कर सकता है शिकायत - बच्चों पर किसी तरह के अत्याचार की शिकायत कोई भी कर सकता है। - शिकायत करने वाला चाहे तो अपना नाम गुप्त रख सकता है। कहां हो सकती है शिकायत चाइल्ड लेबर से जुड़ी जानकारी तीन तरीके से दे सकते हैं : 1 - पुलिस (100 नंबर पर डायल करके) या थाने में जाकर लिखित रूप से 2 - सरकार की चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर डायल करके 3 - बच्चों के लिए काम करने वाले एनजीओ (मिसाल के तौर पर बचपन बचाओ आंदोलन की हेल्पलाइन 011-49211111) ये हेल्पलाइनें रोज और 24 घंटे काम करती हैं। कौन करेगा कार्रवाई - बच्चों के साथ होने वाली किसी भी परेशानी के लिए पुलिस को कार्रवाई के निर्देश हैं। - अगर शिकायत उनसे लेबर करवाने के बारे में भी है, तब भी लेबर डिपार्टमेंट पुलिस की मदद से ही ऑपरेशन को पूरा करते हैं। - चूंकि बच्चों के किसी भी तरह के शोषण को आईपीसी और जेजे एक्ट के तहत गैरकानूनी करार दिया गया है इसलिए पुलिस की जिम्मेदार गुनहगार को कानून के सामने पेश करने की है। - सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी 2013 को दिए अपने फैसले में पुलिस को निर्देश दिया था कि जब भी इस तरह के मामलों में शिकायत हो, पुलिस जरूरी तौर पर एफआईआर दर्ज करे और मामले की छानबीन करे। - जुवेनाइल से जुड़े केसों को देखने के लिए ट्रेंड पुलिस अफसरों की देश के हर जिले में एक यूनिट बनाई जाए। - जुवेनाइल केसों को स्पेशल पुलिस अधिकारी देखें। - ये पुलिस अधिकारी सादे कपड़े में हों और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के साथ मिलकर काम करें। कितनी है सजा - बच्चों से मजदूरी करवाने वालों के खिलाफ चाइल्ड लेबर एक्ट के तहत एक साल तक कैद और 10 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। - खतरनाक इंडस्ट्री में काम करवाने, बंधुआ मजदूरी कराने पर जेजे एक्ट के तहत 3 साल तक कैद का प्रावधान है। - अगर बच्चा किसी की देखरेख में है और उसे मानसिक या शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता है तो दोषियों को जुर्माना और 6 महीने तक कैद हो सकती है। पार्कों में खेलने का अधिकार भारत ने कंवेंशन ऑफ चाइल्ड राइट्स पर दस्तखत भी किए हैं और इस तरह सरकार की ड्यूटी है कि वह बच्चों के वेलफेयर के बारे में सोचे। वह पार्कों को बेहतर बनाए, जहां बच्चे खेल सकें ताकि उनका सही विकास हो सके। राजधानी दिल्ली के चिल्ड्रेन पार्कों के खस्ता हालात के बारे में सुप्रीम कोर्ट के जज के लिखे लेटर पर संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा था कि वह पार्क की स्थिति को ठीक करने के लिए तुरंत कारगर कदम उठाएं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को लेटर लिखा था और कहा था कि यह मुद्दा गंभीर है। बच्चे वहां खेलने जाते हैं और पार्क की स्थिति ठीक नहीं है और इस तरह यह बच्चे के मानवाधिकार का उल्लंघन है। फिलहाल बच्चों को पार्क में खेलने को लेकर कोई कानूनी अधिकार नहीं मिले है।

Thursday, 30 October 2014

Figoismm


Wednesday, 11 June 2014

The Terrible Beas Tragedy

Here, the video of the terrible Beas tragedy. The tragedy could have been avoided and lives of students saved had project officials given prior intimation of the water flow. This video also falsifies claims that students were on the banks of the river: http://goo.gl/X9kgvg

Friday, 28 March 2014

This Pretty Girl Was Seeking A Rich Husband. The Reply She Got From A Banker Was Priceless!


The following is what a women posted on a dating forum seeking a rich husband: 

"I’m going to be honest of what I’m going to say here. I’m 25 this year. I’m very pretty, have style and good taste. I wish to marry a guy with $500k annual salary or above. You might say that I’m greedy, but an annual salary of $1M is considered only as middle class in New York.

 My requirement is not high. Is there anyone in this forum who has an income of $500k annual salary? Are you all married? I wanted to ask: what should I do to marry rich persons like you?

Among those I’ve dated, the richest is $250k annual income, and it seems that this is my upper limit. 

If someone is going to move into high cost residential area on the west of New York City Garden(?), $250k annual income is not enough. 

I’m here humbly to ask a few questions: 

1) Where do most rich bachelors hang out? (Please list down the names and addresses of bars, restaurant, gym)
2) Which age group should I target? 
3) Why most wives of the riches are only average-looking? I’ve met a few girls who don’t have looks and are not interesting, but they are able to marry rich guys. 
4) How do you decide who can be your wife, and who can only be your girlfriend? (my target now is to get married) 

Ms. Pretty 

A philosophical reply from CEO of J.P. Morgan below:

Dear Ms. Pretty,
I have read your post with great interest. Guess there are lots of girls out there who have similar questions like yours. Please allow me to analyse your situation as a professional investor.

My annual income is more than $500k, which meets your requirement, so I hope everyone believes that I’m not wasting time here. From the standpoint of a business person, it is a bad decision to marry you. The answer is very simple, so let me explain.

Put the details aside, what you’re trying to do is an exchange of “beauty” and “money” :
Person A provides beauty, and Person B pays for it, fair and square.
However, there’s a deadly problem here, your beauty will fade, but my money will not be gone without any good reason. The fact is, my income might increase from year to year, but you can’t be prettier year after year.

Hence from the viewpoint of economics, I am an appreciation asset, and you are a depreciation asset. It’s not just normal depreciation, but exponential depreciation. If that is your only asset, your value will be much worse 10 years later.

By the terms we use in Wall Street, every trading has a position, dating with you is also a “trading position”.
If the trade value dropped we will sell it and it is not a good idea to keep it for long term – same goes with the marriage that you wanted. It might be cruel to say this, but in order to make a wiser decision any assets with great depreciation value will be sold or “leased”.

Anyone with over $500k annual income is not a fool; we would only date you, but will not marry you. I would advice that you forget looking for any clues to marry a rich guy. And by the way, you could make yourself to become a rich person with $500k annual income.This has better chance than finding a rich fool. Hope this reply helps.

signed,
J.P. Morgan CEO

Monday, 27 January 2014


Movement Before Life